SOCIAL MEDIA पर वायरल खबर की पड़ताल NEW IT रुल को लेकर फैलाई जा रही है भ्रांतियां, आपके पास भी तो ऐसे मैसेज नहीं आ रहे, हो जाएं सावधान

Whatsapp fact check
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PIB द्वारा जारी VIDEO


SOCIAL MEDIA FACT CHECK: टि्वटर फेसबुक व्हाट्सएप पर नए IT कानून को लेकर सरकार और उससे जुड़ी हुई एजेंसियों के बारे में गलत अफवाह फैलाई जा रही हैं यह अफवाह क्या है और क्या है इसकी सच्चाई

26 मई यानी जिस दिन से भारत सरकार ने सोशल मीडिया के लिए नई गाइडलाइन लागू की है. उस दिन से ही कुछ भ्रामक खबरों द्वारा कुछ शरारती तत्व आम जनता के बीच भय का माहौल खड़ा कर रहे हैं.

भ्रामक खबरों में कहा जा रहा है आपके Whatsapp मैसेज अब सरकार की निगरानी में हैं. जिन मैसेजेस पर लाल निशान लगा है उन लोगों की जांच सरकार द्वारा की जा रही है.

जिन मैसेजेस पर लाल रंग के 3 निशान लगे हैं उसकी जांच पूरी हो चुकी है. उन लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है.

इन सब बातों को लेकर हमने अपने स्तर पर छानबीन की और कुछ फैक्ट चेकर वेबसाइट वेबसाइट्स से भी संपर्क किया. जिसमें यह दावा झूठा निकला.

व्हाट्सएप में मैसेज पर टीक के निशान दिखाए जाते हैं लेकिन इसका संबंध सिर्फ तीन बातों से होता है. पहला संदेश भेजा गया, दूसरा जिसे संदेश भेजा गया उसे संदेश मिल गया और तीसरा जिसे संदेश प्राप्त हुआ उसे उसने पढ़ लिया है.

जिसके लिए सिंगल टिक डबल टिक और ब्लू रंग के डबल टिक का इस्तेमाल व्हाट्सएप द्वारा किया जाता है. इसके अलावा और किसी भी प्रकार के कलर कोड का इस्तेमाल व्हाट्सएप नहीं करता.

इसे लेकर पीआईबी ने भी tweet कर इस खबर को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है. इसलिए अगर ऐसी खबरें आपके पास आ रही हों तो इन खबरों की तुरंत शिकायत करें और इसे आगे फॉरवर्ड ना करें.

मालूम हो कि भ्रामक खबरों पर नकेल कसने के लिए ही भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय ने नए सोशल मीडिया गाइडलाइन जारी किए हैंं

जिसके द्वारा अब किसी भी सोशल मीडिया वेबसाइट को एक नोडल ऑफिसर और एक कंप्लेंट ऑफिसर रखना अनिवार्य है. साथ ही जिन खबरों को लेकर इनसे शिकायत की जाएगी उन शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर संज्ञान लेना अनिवार्य कर दिया गया है.

यहां यह बताना जरूरी है कि नए सोशल मीडिया कानून को लेकर सरकार और सोशल मीडिया एजेंसीज जैसे Whatsapp और twitter के बीच तनातनी का माहौल बना हुआ है.

जहां सरकार का कहना है जिस मैसेजेस से देश की अखंडता, एकता संप्रभुता प्रभावित होती हो उन खबरों के बारे में सोशल मीडिया एजेंसी को सरकार को बताना होगा. जबकि सोशल मीडिया एजेंसीज का कहना है कि हम खबर के सोर्स के बारे में नहीं बता सकते. यह निजता से जुड़ा मामला है.

इसे लेकर व्हाट्सएप दिल्ली हाईकोर्ट की शरण में है. अब देखना यह होगा कि कोर्ट क्या निर्णय देता है. वैसे आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने यह साफ कहा है कि सभी सोशल मीडिया एजेंसी को नियमों का पालन करना होगा.

मालूम हो कि भारत सरकार द्वारा नए कानून को अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स लागू नहीं करते हैं तो उनसे इंटरमीडियरी का तमगा छीन सकता है.

इंटरमीडियरी के कारण ही इन सोशल मीडिया एजेंसी को इम्यूनिटी मिली हुई है. जिसके कारण इन्हें कोर्ट में पार्टी नहीं बनाया जा सकता.

इंटरमीडियरी का मतलब है बिचौलिया यानी अभी तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत में बिचौलिया का दर्जा प्राप्त है. जिसमें इनका काम संदेश देने वाले और संदेश प्राप्त करने वाले के बीच सिर्फ और सिर्फ माध्यम का है. इस कारण इन्हें कोर्ट में पार्टी नहीं बनाया जा सकता.

अगर social media platforms नियम को नहीं मानते हैं तो IT act की धारा 79 के तहत इनसे इंटरमीडियरी का दर्जा छीना जा सकता है.

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