PRIVACY के मसले पर बनाई गई Social media guideline पर किसका पक्ष सही Whatsapp twitter या फिर IT मंत्रालय का


क्या जिस PRIVACY के मुद्दे पर घमासान मचा है. क्या सच में सरकार (IT मंत्रालय) या फिर SOCIAL MEDIA PLATFORMS इसको लेकर चिंतित हैं. या फिर यहां केले को फेंक कर छिलके के लिए लड़ाई हो रही है.

सरकार के हर फैसले में दोष निकालना उचित नहीं है.लेकिन जब मुद्दा “अतिव्यक्तिगत” हो तो उस पर चर्चा जरूरी है.

जैसे-जैसे दुनिया में DIGITALसुविधाओं का विकास होते जा रहा है वैसे-वैसे लोगों का आकर्षण वास्तविक मेलजोल से ज्यादा डिजिटल मेलजोल की ओर बढ़ता जा रहा है.

आज तो व्यवहार से लेकर व्यापार तक की कल्पना इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बिना नहीं की जा सकती है. ऐसे में कोई यह नहीं चाहता कि उसकी व्यक्तिगत जिंदगी में कोई ताक झांक करें.

लेकिन सत्य तो यही है कि इस डिजिटल वर्ल्ड में कुछ भी व्यक्तिगत नहीं यहां प्राइवेसी ठीक वैसे ही है जैसे ट्रेफिक चालान से बचने के लिए सस्ता और घटिया हेलमेट लगाकर लोग खानापूर्ति करते हैं.

इन सभी मुद्दों पर इस VIDEO में चर्चा की गई है.

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