Shivling

Gyanvapi Mosque Survey Shivling Vs Fountain Controversy: ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग या फव्वारा, हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अलग-अलग दावे..

Gyanvapi Mosque Survey Shivling Vs Fountain Controversy: ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने को लेकर हिंदू पक्ष ने किया दावा, मुस्लिम पक्ष ने कहा यह शिवलिंग नहीं है यह तो फव्वारा है लेकिन सबसे बड़ा सवाल कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे को को लेकर गोपनीयता की जो शर्त रखी थी उड़ रही है उसकी धज्जियां..

आज ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे(Gyanvapi Mosque Survey) का अंतिम दिन था और हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष की तरफ से अलग-अलग दावे किए गए. जिसमें हिंदू पक्ष ने मस्जिद में एक बड़े आकार का शिवलिंग(Shivling) मिलने का दावा किया है तो वहीं मुस्लिम पक्ष ने इन सभी बातों को एक सिरे से खारिज करते हुए इसे एक फव्वारे का टुकड़ा बताया.

लेकिन इन सबके बीच जो एक सबसे बड़ा सवाल है वह यह है कि कोर्ट के संबंध में एक शब्द का प्रयोग हमेशा किया जाता है और वह शब्द है अवमानना यानी कोर्ट की अवहेलना, ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे(Gyanvapi Masjid Survey) को लेकर जिस प्रकार से मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है वह बेहद ही चिंता का विषय है. इससे कोर्ट की मर्यादा भी तार-तार हुई है.

ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे को लेकर सिविल कोर्ट ने साफ साफ कहा था कि सर्वे से संबंधित सभी जानकारियों को गोपनीय रखा जाएगा और 17 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश किया जाएगा लेकिन पहले दिन से ही मीडिया द्वारा तरह-तरह की कपोल कल्पित रिपोर्टिंग की जा रही है. जिसमें कहीं-कहीं सर्वे में मिले साक्ष्यों का भी जिक्र होता है.

मालूम हो कि आज ज्ञानवापी परिसर में सर्वे का आखिरी दिन था और आज एक अप्रत्याशित या खबर ने दिनभर सुर्खियां बटोरी. वह खबर थी मस्जिद में 12 फुट का शिवलिंग मिलना(Shivling Found In Gyanvapi Mosque). इस दावे को उस समय बल मिला जब हिंदू पक्ष के पैरोकार ने सामने आकर कहा कि हमें जो मिलना था उससे अधिक हमें मिला, हमें बाबा मिल गए.

मस्जिद में सर्वे का काम जारी था उसी समय हिंदू पक्ष के वकील ने सिविल कोर्ट का रुख किया और वहां एक प्रार्थना पत्र सौंपा की मस्जिद में सर्वे के दौरान शिवलिंग की प्राप्ति हुई है और कोर्ट से या गुजारिश है कि उस जगह को सुरक्षित कर दिया जाए और वहां पर किसी भी मुस्लिम व्यक्ति के प्रवेश को वर्जित किया जाए.

कोर्ट ने तुरंत ही इस मामले पर संज्ञान लिया और आदेश जारी करते हुए डीएम और एसपी(Varanasi DM SP) से कहा कि उस जगह को सील कर दिया जाए और वहां की सुरक्षा बढ़ा दी जाए तथा वहां पर किसी भी व्यक्ति को जाने की इजाजत नहीं दी जाए.

अभी तक पुख्ता रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है कि  सर्वे के दौरान आज जो चीज वहां प्राप्त हुई है वह शिवलिंग ही है लेकिन हिंदू पक्ष के दावे और उनके आत्मविश्वास को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि उन्हें मस्जिद में कुछ ना कुछ ऐसी चीज मिली है जिससे उनके दावों को बल मिला है.

अब देखना यह है कि कल 17 मई को कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट में किन-किन बातों का खुलासा होता है. दूसरी तरफ कल सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर सुनवाई भी होनी है. मुस्लिम पक्ष  का कहना है कि संसद द्वारा बनाए गए 1991 के कानून को लागू किया जाए और 1947 में जो स्थिति थी उसी को बरकरार रखी जाए.

मालूम हो कि संसद ने 1991 में एक नियम बनाया था जिसके अंतर्गत बाबरी मस्जिद मामले को छोड़ भारत में किसी भी अन्य धार्मिक स्थल के स्वरूप को बरकरार रखने की बात कही गई थी. अब देखना यह है कि सिविल कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला जिसमें कि ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराया जा रहा है वह संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार है या नहीं. अगर इस सर्वे से कुछ चीजें बदलती हैं तो यह साफ है की इसका दूरगामी असर होगा और फिर मथुरा सहित कई अन्य जगहों को लेकर भी फिर से नए सिरे से बहस शुरु हो जाएगी.

जिस शिवलिंग के मिलने की बात आज की जा रही है उसके बारे में पहले भी कई इतिहासकारों ने दावे किए हैंं. इतिहासकारों का दावा है कि  शिवलिंग की स्थापना अकबर के मंत्री द्वारा अकबर के आदेश पर किया गया था. उस समय अकबर के मंत्री टोडरमल ने 1585 ईसवी में शिवलिंग की स्थापना करवाई थी. यह शिवलिंग पन्ना पत्थर का बना हुआ बताया जा रहा है.

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