bengal and delhi covid 19 trend

Delhi Bengal Corona Trend: Bengal की आबादी Delhi से बहुत ही ज्यादा, लेकिन Corona टेस्टिंग में फिसड्डी, क्या Election के बाद बंगाल बनेगा Covid-19 का अगला टारगेट और क्या कूपन बांट कर वोट बटोर रही है BJP, टीएमसी और लेफ्ट नेताओं ने लगाये आरोप

दिल्ली की आबादी लगभग 2 करोड़ (1,9814000) है. वहीं पश्चिम बंगाल की आबादी साढ़े नौ करोड़ (9,6914000) से अधिक है. लेकिन Covid Testing की बात करें तो यहां टेस्टिंग के आंकड़े बेहद ही चौंकाने वाले हैं..

DELHI जहां दिन प्रतिदिन Covid-19, TESTING के आंकड़े को बढ़ाते जा रही है और वर्तमान में प्रतिदिन एक लाख से भी अधिक कर दिया है वहीं BENGAL ने अपने ट्रेंड को उल्टा कर रखा है. जनवरी अंत से बंगाल में टेस्टिंग के आंकड़े लगातार कम होते जा रहे हैं और फरवरी-मार्च एवं अप्रैल में औसतन 22 से 25 हजार टेस्ट ही प्रतिदिन किये जा रहे हैं जबकि चुनाव से पहले केंद्र सरकार द्वारा हमेशा यह कहा जा रहा था कि बंगाल की स्थिति वास्तविकता से परे है यहां जांच में आए दिन अनियमिताएं  बढ़ती जा रही हैं तो फिर अचानक से चुनाव में कोरोना का मुद्दा कैसे गुम हो गया साथ ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने कोरोना के सारे नियम कानून प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए रोड शो और बड़ी बड़ी रैलियों का आयोजन कैसे किया और तो और सभी पार्टियों ने इन रैलियों की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकांउट पर अपलोड भी किए.

HEALTH MINISTERS TWEET
Dr. Harsh Vardhan ने ये तस्वीर tweet की है जिसमें भीड़ को साफ देखा जा सकता है.

यहां तक कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के ट्विटर अकाउंट से भी ऐसी तस्वीरें पोस्ट की गई जिसमें रैली में आए हुए लोग कोरोना महामारी के लिए जारी गाइडलाइन का सरेआम उल्लंघन करते नजर आए.

कहीं किसी पार्टी ने 6 लाख लोगों के आने के दावे किए तो कहीं किसी पार्टी ने इससे भी अधिक.

एक बात समझ से परे है कि चुनाव आयोग ने जिस पर की चुनाव में कोरोना नियमों के पालन करवाने की सारी जिम्मेदारी है वह अपनी आंखें क्यों  मूंदे हुए है. कहीं ऐसा ना हो कि चुनाव के बाद बंगाल की स्थिति कोरोना मामले में खतरनाक स्तर तक पहुंच जाए और बंगाल के लोगों को एक बार फिर से LOCKDOWN जैसी त्रासदी से गुज़रना पड़े.

एक नजर बंगाल और दिल्ली के आंकड़ों पर:-

बंगाल

कुल मरीजों की संख्या:- 597634

कुल टेस्टिंग:- 93.3 lakh

कुल मौतें:- 10355

दिल्ली

कुल मरीजों की संख्या:- 685062

कुल टेस्टिंग:- 1.5 cr

कुल मौतें:- 11,113 **ये  सभी आंकड़े  covid-19india.org से लिये गये हैं.

लेफ्ट और टीएमसी के नेताओं के आरोप, कूपन बांट कर वोट बटोर रही है बीजेपी

चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो चलता रहता है कभी पक्ष का विपक्ष पर तो कभी विपक्ष का पक्ष पर.एक ताजा मामले में TMC के कुछ नेताओं ने BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं.आरोप में कहा गया है कि बीजेपी को जनसमर्थन और रैलियों में लोग नहीं मिल रहे इस कारण हजार-हजार रुपए के कूपन  मोदी जी की रैलियों में बांटे जा रहे हैं. इस प्रकार के कूपन बंगाल के 24 परगना इलाके के गांव में बांटे गए हैं ऐसा टीएमसी और लेफ्ट नेताओं का आरोप है. वहीं इन आरोपों पर बीजेपी ने सफाई देते हुए कहा है कि यह कूपन नहीं है बल्कि यह चंदे की रसीद है जिसे कि लोगों ने स्वेच्छा से दिया है और टीएमसी तथा लेफ्ट के नेताओं द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार,तथ्यहीन और सच्चाई से परे है.

नहीं मिल रहे  POLLING AGENT

वही बंगाल में कुछ बूथों पर कहीं TMC तो कहीं बीजेपी को पोलिंग एजेंटों की भारी किल्लत हो रही है. जबकि मालूम हो की चुनाव आयोग ने पोलिंग एजेंट संबंधित नियमों में बदलाव कर दिये हैं जिसके अंतर्गत अब कोई भी व्यक्ति जो उस विधानसभा जहां चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और अगर वह उस विधानसभा का पंजीकृत मतदाता है तो वह उस विधानसभा के अंतर्गत कहीं भी किसी बूथ पर पोलिंग एजेंट नियुक्त हो सकता है. इस संशोधन के बाद टीएमसी और लेफ्ट नेताओं ने चुनाव आयोग का जमकर विरोध किया था और कहा था कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि चुनाव आयोग बीजेपी को मदद पहुंचाना चाहता है. इसके लिए टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग को ज्ञापन भी सौंपा था. आज जिस प्रकार से दोनों ही पार्टियों को पोलिंग एजेंट की किल्लत हो रही है उसे देखते हुए ऐसा लगता है चुनाव आयोग का निर्णय कहीं ना कहीं जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए और चुनावी प्रक्रियाओं को सही तरीके से संपन्न कराने के लिए उठाया गया एक उचित कदम था.