CORONA के बढ़ते मामलों के बीच Baba Ramdev के Coronil पर फिर नया विवाद, IMA का डॉ हर्षवर्धन से सवाल और महाराष्ट्र के गृह मंत्री का बयान WHO और IMA के बिना प्रमाणन कोरोनिल स्वीकार नहीं

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एक बार फिर से कोरोना देश के कुछ बड़े राज्यों और शहरों में पैर फैलाने लगा है. इसका अनुमान एक्टिव मरीजों की संख्या में हो रही वृद्धि से लगाया सकता है. एक लाख 56 हजार से अधिक लोगों की मौत कोरोनावायरस से हो चुकी है. अक्टूबर के बाद ऐसा पहली बार है कि महाराष्ट्र में लगभग सात हजार नए मामले एक दिन में आए हैं.

कोरोना पर लगाम कसने में भारत सरकार और राज्य सरकारों के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन इस महामारी के प्रति अब जागरूकता की कमी साफ़-साफ़ देखी जा सकती है.

अगर बिहार चुनाव और वर्तमान में बंगाल चुनाव प्रचार को देखें तो ऐसा लगता है कोरोना का ख़ौफ़ आम लोगों से लेकर नेताओं तक अब उतना नहीं रहा जितना कि पहले था.

वैसे खौफ़ रहना भी नहीं चाहिए क्योंकि ये अच्छी चीज नहीं होती लेकिन जागरूकता ना रहे यह खतरनाक स्थिति है.

महामारी के प्रति लोग लापरवाही ना बरतें इस कारण lockdown के दौरान Pandemic Act लागू था लॉकडाउन के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पुलिस ने धारा 188 के तहत बहुत सारे लोगों पर मामले दर्ज़ किए थे और अभी हाल में बहुत सारे मामलों को वापस भी लिया गया.

इसका ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश का है जहां लगभग 2.5 लाख लोगों पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है.

उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जिसने मामलों को वापस लेने के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाया है. सरकार ने ऐसा इसलिए किया है कि इससे आम जनता और व्यापारियों को राहत मिलेगी. बताते चलें केस वापसी में तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज़ किए गए 323 केस भी शामिल है जिसे वापस लेने का फैसला किया गया है.

मामलों को वापस लिया जाना भी जरूरी है क्योंकि इससे भय का माहौल बनता है और ऐसे माहौल में खासकर आर्थिक गतिविधियों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है.

यूपी सरकार के इस प्रयास को सकारात्मक रूप से देखने की जरूरत है.लोग ये ना समझें कि अब वो अपनी मनमानी कर सकते हैं क्योंकि इससे एक बार फिर से कोरोनावायरस को अपने पुराने रूप में लौटने का मौका मिल सकता.

अब बात करते हैं कोरोना की दवा Coronil की जिसे पतंजलि ने बनाया है और बाबा रामदेव जिसका जोर शोर से प्रचार कर रहे हैं.

कोरोनिल के साथ विवादों का संबंध कोई नया नहीं है इसके फर्स्ट लॉन्चिंग से ही विवाद खड़ा हो गया था. जब बाबा रामदेव ने इसे कोरोनावायरस की दवा कहा था.

बहुत ज्यादा विवाद बढ़ने और स्वास्थ्य मंत्रालय के कड़े रुख अख्त़ियार करने के बाद इसे Immunity Booster के रूप में प्रचारित किया गया.

एक बार फिर से बाबा रामदेव ने Coronil की Launching की है और कहा है कि अब यह कोरोना कि दवा है ना कि सिर्फ इम्यूनिटी बूस्टर. बाबा रामदेव के अनुसार विश्व में यह पहली दवा है जो कोरोना को पूर्ण रूप से खत्म कर सकती है. इसे लोग चाहें तो VACCINATION के पहले या बाद में भी ले सकते हैं.

बाबा रामदेव ने कहा कोरोनिल पर पतंजलि ने साइंटिफिक रिसर्च किया है और इस रिसर्च के सारे पेपर केंद्र सरकार को देने के बाद केंद्र सरकार ने दवा को मंजूरी दी है.

यह मंजूरी डब्ल्यूएचओ की मान्यताओं पर आधारित है. इस दवा को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के आधार पर अनुमति दी गई है.

बाबा रामदेव के अनुसार इस मंजूरी के बाद इस दवा को दुनिया के डेढ़ सौ से ज्यादा देशों में बेच सकते हैं.

एक टीवी इंटरव्यू के दौरान बाबा रामदेव बच्चों को भी इस दवा को देने की वकालत करते नजर आए. अगर वैक्सीनेशन प्रक्रिया की बात करें तो वहां भी अभी बच्चों को शामिल नहीं किया गया है.

बाबा रामदेव के दावों के बीच कोरोनिल का नाम का जिक्र किए बिना विश्व स्वास्थ्य संगठन की दक्षिण पूर्व एशियाई यूनिट ने एक Tweet कर यह बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने Corona के इलाज में किसी पारंपरिक दवा के प्रभाव को मंजूरी नहीं दी है.

कोरोनील पर यह नया विवाद इतना अधिक तूल नहीं पकड़ता अगर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन इसकी लॉन्चिंग में उपस्थित नहीं रहते क्योंकि डॉक्टर हर्षवर्धन को मई 2020 में डब्ल्यूएचओ के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया था. सवाल उठना लाजमी था, एक तरफ WHO ऐसे किसी भी दावे का खंडन करता है और दूसरी तरफ दवा की लॉन्चिंग में हर्षवर्धन शिरकत करते हैं.

IMA यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी हर्षवर्धन की नैतिकता पर सवाल उठाया है.IMA का कहना है कि इस प्रकार के भ्रामक प्रचार से कोरोना के रोकथाम में बाधा आ सकती है.

वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने कहा है कि बिना डब्ल्यूएचओ और आईएमए के प्रमाण पत्र के हम कोरोनिल की बिक्री महाराष्ट्र में नहीं होने देंगे क्योंकि हमें लोगों के स्वास्थ्य की फिक्र है. स्वास्थ्य के साथ कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा.

अंत में एक बात जो सबसे ज्यादा जरूरी है वह यह है कि आम जनता को कोरोना पर अफवाहों से बचना चाहिए और वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में अपनी सहभागिता को सुनिश्चित करनी चाहिए. क्योंकि अभी तक कोई भी दवाई संपूर्ण विश्व में नहीं है जो कि कोरोनावायरस को खत्म कर सके.

हां यह अलग बात है कि कुछ देसी दवाइयों और आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से हम अपनी इम्यूनिटी यानी रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं.

इसके लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कुछ सुझाव दिए हैं जिसे आत्मसात किया जा सकता है. लेकिन कोई भी उपाय अभी तक मास्क लगाना, हाथ धोना और दो गज़ की शारीरिक दूरी का पर्याय नहीं है.

 

 

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