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CENTRAL VISTA PROJECT: रुकवाने गए थे सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट दिल्ली HC ने लगाया जुर्माना

CENTRAL VISTA PROJECT जिसके अंतर्गत नया संसद भवन प्रधानमंत्री आवास और उपराष्ट्रपति आवास का निर्माण किया जा रहा है.

शुरू से ही यह प्रोजेक्ट विवादों में रहा. इस प्रोजेक्ट पर कभी इतिहासकारों ने तो कभी  पर्यावरणविदों ने तो कभी देश के बड़े-बड़े आर्किटेक्ट्स  ने सवाल उठाए.

विपक्ष के निशाने पर तो यह प्रोजेक्ट हमेशा से रहा. इसे लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया गया.

लेकिन इस प्रोजेक्ट को हर बार हरी झंडी मिलती गई आज एक अन्य मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस प्रोजेक्ट को रोकने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया साथ ही साथ याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया.

इस याचिका को अनन्य मल्होत्रा और इतिहासकार एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर सोहेल हाशमी ने दायर की थी.

इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने फैसला दिया है.

खंडपीठ में चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह शामिल थी. दो जजों की खंडपीठ ने इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि कोविड-19 के दौरान यह कंस्ट्रक्शन वर्क चुकी एसेंशियल एक्टिविटी के अंतर्गत नहीं आते इस कारण तत्काल इस निर्माण कार्य पर रोक लगा दी जाए.

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आज एक टीवी इंटरव्यू में सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट को लेकर झूठी अफवाह पर कड़ा ऐतराज जताया है.

मंत्री हरदीप पुरी ने सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट को 20 हजार करोड़ का बताए जाने पर भी आपत्ति जताई है.

उनका कहना है यह आंकड़े कहां से आ रहे हैं. यह वास्तविकता से परे और यह सिर्फ और सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए किए जा रहे हैं.

उनका कहना है निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की कुल लागत – संसद भवन और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू – लगभग 1,300 करोड़ रुपये है.

संसद भवन पर लगभग 862 करोड़ रुपये और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू पर 477 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

विपक्ष का कहना है corona जैसी विकट परिस्थिति में जब देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब है. इस कारण इस प्रकार की फिजूलखर्ची पर रोक लगनी चाहिए.

लेकिन सरकार का तर्क है इस प्रोजेक्ट से लोगों को रोजगार मिल रहा है और साथ ही साथ इस निर्माण पर देश को गर्व भी होगा.

वहीं आज याचिका को खारिज करते समय जजों की खंडपीठ ने इस याचिका को पब्लिक इंटरेस्ट के रूप में मानने से इनकार किया और इसे मोटिवेटेड करार दिया.

मालूम हो कि नवंबर 2022 तक नए संसद भवन का निर्माण होना हैं और प्रधानमंत्री आवास के लिए समय सीमा दिसंबर 2022 की रखी गई है.