Sister Abhaya Murder Case Virginity Test Controversy: सिस्टर अभया हत्याकांड जेल में बंद सिस्टर सेफी के वर्जिनिटी टेस्ट पर कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

Sister Abhaya Murder Case
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Sister Abhaya Murder Case Virginity Test Controversy: सिस्टर अभया हत्याकांड जेल में बंद सिस्टर सेफी(sister Sephy) का CBI द्वारा कराया गया था वर्जिनिटी टेस्ट अब कोर्ट ने वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर दिया बड़ा फैसला

सिस्टर अभया हत्याकांड(Sister Abhaya Murder Case) को लेकर एक बड़ा फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया है. यह मामला 27 मार्च 1992 का है जब सैंट पियस एक्स कान्वेंट जोकि केरल के कोट्टायम में है जहां 18 वर्षीय सिस्टर अभया(Sister Abhaya Death) कुएं में मृत पाई गई थी.

इस हत्याकांड को लेकर काफी हंगामा मचा था.इसके बाद इस हत्याकांड की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी. सीबीआई ने इस मामले में 2 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया जिसमें पहला नाम फादर कोट्टूर का था और दूसरा सिस्टर सेफी(Sister sephy) का.

सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में यह कहा था कि सिस्टर सेफी और फादर के बीच शारीरिक संबंध(Phsical Relationship) थे और इस शारीरिक संबंध की जानकारी सिस्टर अभया को लग गई थी और इसे छुपाने के लिए इन दोनों ने मिलकर सिस्टर अभया की हत्या कर दी.

साल 2020 में सीबीआई कोर्ट(CBI Court) ने फादर कोट्टूर और सिस्टर सेफी को उम्र कैद की सजा सुना दी थी लेकिन इन दोनों  लोगों को केरल हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी और इनकी सजा सस्पेंड हो गई थी. सीबीआई कोर्ट में सीबीआई ने जो साक्ष्य पेश किए थे उसमें एक था सिस्टर सेफी का वर्जिनिटी टेस्ट.

वर्जिनिटी टेस्ट में सिस्टर सेफी फेल हो गई और सीबीआई ने इस आधार पर यह माना कि सिस्टर और फादर के बीच शारीरिक संबंध थे और इस हत्याकांड के लिए यही अवैध शारीरिक संबंध जिम्मेदार था.

सिस्टर सेफी का वर्जिनिटी टेस्ट जेल में बंद होने के दौरान कराया गया था. इसलिए यह मामला बेहद ही चर्चा में आ गया. आज इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई इंसान जेल में भी बंद होता है तो भी वो आत्मसम्मान का अधिकारी है और उसके मौलिक आत्म सम्मान को बनाए रखना बेहद ही जरूरी है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि पुलिस कस्टडी या फिर न्यायिक हिरासत में भेजे गई महिला कैदियों का वर्जिनिटी टेस्ट कराना संविधान का उल्लंघन है और यह बेहद ही गंभीर मामला है. हाईकोर्ट ने तो यहां तक कहा कि सिस्टर सेफी को कोर्ट यह अनुमति देता है कि वे अपने मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ मुआवजा का मांग भी कर सकती हैं.

कोर्ट के इस आदेश का सीबीआई ने विरोध भी किया और इस पर आपत्ति भी जताई. लेकिन कोर्ट ने सीबीआई की आपत्तियों को खारिज कर दिया. अब देखना यह है कि इस मामले में(Sister Abhaya Murder Case ) पीड़िता सिस्टर सेफी  अपने लिए मुआवजे का मांग करती हैं या नहीं.

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