Subhash Chandra Bose

Subhash Chandra Bose: इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित लेकिन Amar Jawan Jyoti पर विवाद बढ़ा

Subhash Chandra Bose: इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को स्थापित कर दिया गया है वहीं अमर जवान ज्योति(Amar Jawan Jyoti) के स्थान परिवर्तन पर सरकार विपक्ष के निशाने पर

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को इंडिया गेट पर स्थापित किया गया. इसको लेकर जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है तो वहीं विपक्ष के साथ-साथ कई अन्य लोग अमर जवान ज्योति( Amar Jawan Jyoti) को इंडिया गेट से हटाने पर सरकार पर तीखा प्रहार कर रहे हैं.

बताते चलें कि 23 जनवरी को  PM Modi द्वारा प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा. अभी जो प्रतिमा दिखाई दे रही है वो एक प्रतीक के तौर पर सुभाष चंद्र बोस का होलोग्राम है.

मालूम हो कि आज 21 जनवरी 2022 को अमर जवान ज्योति(Amar Jawan Jyoti) को इंडिया गेट से हटा दिया गया. इसका स्थान परिवर्तन ही नहीं किया गया बल्कि इसकी मशाल को वॉर मेमोरियल(War Memorial) की मशाल में समाहित कर दिया गया.

वार मेमोरियल की मशाल में अमर जवान ज्योति की मशालकी लौ के मिलने का अर्थ यह है कि अब अलग से अमर जवान ज्योति की लौ प्रज्वलित नहीं की जाएगी.

अमर जवान ज्योति(Amar Jawan Jyoti) क्यों है महत्वपूर्ण

मालूम हो कि इंडिया गेट अमर जवान ज्योति की अनवरत जलती लौ 1971 में भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को समर्पित है

1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध ऐतिहासिक इसलिए माना जाता है क्योंकि इस युद्ध ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश का निर्माण किया था और विश्व मानचित्र पर पाकिस्तान के नक्शे को बदल कर रख दिया था.

इंडिया गेट से अमर जवान ज्योति के स्थान परिवर्तन को लेकर सरकार के पक्ष और विपक्ष में लोग लामबंद होने लगे हैं.  सरकार के पक्ष में बोलने वालों का कहना है वार मेमोरियल की मशाल में अमर जवान ज्योति की मशाल का समाहित होना राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय गर्व की बात है.

वहीं अमर जवान ज्योति के स्थान परिवर्तन को लेकर विरोध में बोलने वालों का तर्क भी काटने योग्य नहीं है.

अमर जवान ज्योति के स्थान परिवर्तन और इसकी लौ को वॉर मेमोरियल की मशाल में समाहित करने पर कुछ लोग विरोध भी दर्ज करा रहे हैं. लोगों का कहना है कि सरकार भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रही है और यह शहीद हुए जवानों का अपमान है.

मालूम हो कि कांग्रेस हमेशा से बीजेपी पर यह आरोप लगाते आ रही है कि बीजेपी पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किए गए कार्यों को आम जनता की नजरों से ओझल करना चाहती है. जिसके लिए वह हमेशा कुछ न कुछ प्रोपेगेंडा करते रहती है.

वहीं जब हमारी टीम ने इस मुद्दे पर लोगों से बातचीत की तो लोगों का यह कहना था कि सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को स्थापित करना एक ऐतिहासिक निर्णय है लेकिन अमर जवान ज्योति के स्थान परिवर्तन से पहले सरकार को विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ जनता से भी राय मशवरा करना चाहिए था.