जो कंपनी कमा रही है मुनाफा, फिर क्यों बेचना चाह रही है मोदी सरकार?? BPCL के मुनाफे को देखकर हैरान रह जाएंगे आप!!

BPCL
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PUBLIC SECTOR की कंपनियां अगर सामान्य भाषा में कहें तो ऐसी कंपनियां या उपक्रम जिनका मालिकाना हक सरकार के पास हो.

ऐसी कंपनियों पर खासकर भारतीय जनमानस का विश्वास अधिक होता है क्योंकि उसे लगता है जिसका संचालन सरकारी हाथों में हैं वह ज्यादा सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद है.

साथ- साथ अगर इन कंपनियों को महारत्न या नवरत्न का दर्जा प्राप्त हो तो येे विश्वास और भी प्रबल हो जाता है.

तो सवाल यह उठता है कि आखिर सरकार इन कंपनियों को निजी हाथों में क्यों देना चाहती है!!!

इन कंपनियों के बही खातों को खंगाला जाए तो एक दो कंपनियों को छोड़कर अधिकतर कंपनियों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है.

दूसरी बात अगर सरकार को लगता है कि इन कंपनियों का संचालन घाटे का सौदा है जैसा कि निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था.

तो इस बात की पड़ताल आवश्यक हो जाती है कि यह कहां तक सही है क्योंकि ताजा घटनाक्रम जिसका जिक्र करने जा रहे हैं उसे देखकर तो ऐसा नहीं लगता.

आज बात करते हैं भारत सरकार द्वारा 2017 में महारत्न का दर्जा प्राप्त बीपीसीएल की यानी भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की.जिसमें सरकार की हिस्सेदारी 52.98% है जिसे सरकार बेचना चाह रही है.

चालू वित्त वर्ष 2020-21 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के आंकड़े चौंकाने वाले हैं

चालू वित्त वर्ष 2020-21 के अक्टूबर दिसंबर तिमाही में बीपीसीएल का मुनाफा 120% उछलकर 2777.6 करोड़ रूपया रहा.

इससे पूर्व 2019-20 की इसी तिमाही में कंपनी को 1260.6 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था.

बीपीसीएल के निदेशक (वित्त) एन.विजय.गोपाल ने कहा चालू वित्त वर्ष में लाभ के रूप में तीसरी तिमाही काफी बेहतर रही.हम बिक्री के मामले में COVID-19 केे पूर्व स्तर पर आ गए हैं.

कंपनी को यह मुनाफा तेल की कीमत बढ़ने से हुआ है क्योंकि कंपनी ने ईंधन तैयार करने के लिए कच्चा तेल कम दाम पर खरीदा था.

विगत वर्षों में BPCL का कैसा रहा प्रदर्शन

जब इस कंपनी को महारत्न का दर्जा दिया गया था यानी 2017 में तो कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंधक निर्देशक डी राजकुमार ने कहा था कंपनी ने उत्कृष्ट परिणाम दिया है उनके अनुसार भविष्य को ऊर्जाशील बनाना और भारत के विकास की कहानी में शामिल होना किसी भी कंपनी की आकांक्षा होती है और हमें यकीन है निकट भविष्य में हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे.

कंपनी का 2016 -17 में शुद्ध लाभ 8039.30 करोड़ रुपए रहा था. 2016-17 के दौरान कंपनी का प्रति शेयर अर्जन 61.3 ₹ रहा जो कि कंपनी के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक है.

2017 में वर्तमान सरकार ने ही दिया था BPCL को महारत्न का दर्ज़ा,  फिर भी अन्य पीएसयू के मुकाबले बीपीसीएल को बेचने में सरकार इतनी तत्पर क्यों!!

बीपीसीएल देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है यह सरकार को हमेशा मुनाफा देती है. इसलिए सरकार को लगता है LIC और AIR INDIA के मुकाबले इसको बेचना ज्यादा आसान है क्योंकि बोली लगाने वाली कंपनियां बीपीसीएल को ज्यादा तवज्जो देंगी.

दूसरी एक और वजह है कोरोना महामारी के कारण सरकार की वित्तीय स्थिति को तगड़ा झटका लगा है. BPCL में हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 45 हजार करोड़ मिलने की संभावना है.

मालूम हो कि सरकार ने वर्ष 2020-21 के दौरान अलग-अलग कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था.वहीं वर्ष 2021-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा है जिसमें बीपीसीएल की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है.

आखिर मोदी सरकार ने ऐसा क्या किया, जिसके कारण इन कंपनियों को बेचने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी नहीं रही

2003 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था बीपीसीएल और एचपीसीएल का निजीकरण संसद द्वारा कानून के संशोधन के जरिए ही किया जा सकता है. फिर ऐसा क्या हुआ जिस कारण अब इसे संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं रही.

ऐसा इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि केंद्र सरकार ने पब्लिक सेक्टर की कंपनी भारत पेट्रोलियम के राष्ट्रीयकरण संबंधी कानून को 2016 में ही रद्द कर दिया था तथा राष्ट्रपति ने निरसन एवं संशोधन कानून 2016 को मंजूरी दे दी थी.

ऐसे में भारत पैट्रोलियम को निजी या विदेशी कंपनी को बेचने के लिए सरकार को संसद की अनुमति लेने की जरूरत नहीं रही.

महारत्न का दर्जा यूं ही नहीं मिल जाता, इसके लिए हैं कड़े नियम, जानिए किन-किन मापदंडों का पालन करने के बाद मिलता है महारत्न का दर्ज़ा

सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उपक्रमों को अपने कारोबार का विस्तार करने तथा विश्व की बड़ी कंपनियों के रूप में उभरने में समर्थ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी 2010 में भारत में महारत्न का दर्जा देने संबंधित योजना की शुरुआत की थी. महारत्न का दर्जा उन्हीं कंपनियों को दिया जाता है जो इन शर्तों को पूरा करती हैं….

  • भारत में महारत्न का दर्जा उन्हीं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों दिया जाता है जिनको पहले से ही नवरत्न का दर्जा प्राप्त हो.
  • जिनका बीते 3 वर्षों के दौरान औसत सालाना कारोबार 25 हजार करोड़ से ज्यादा का हो.
  • बीते 3 वर्षों के दौरान औसत सालाना शुद्ध संपत्ति 15 हजार करोड़ से ज्यादा का हो
  • टैक्स अदायगी के बाद 3 वर्षों के दौरान औसत सालाना शुद्ध लाभ 5000 करोड़ से ज्यादा का हो

साथ ही साथ  इनका अंतरराष्ट्रीय परिचालन होना चाहिए यानी यह वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों. महारत्न कंपनी एक परियोजना में पांच हजार करोड़ का निवेश कर सकती हैं.

मालूम हो केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2019 में पब्लिक सेक्टर की दो कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन को भी महारत्न का दर्जा दिया था.

इससे पहले केंद्र सरकार ने साफ किया था कि पब्लिक सेक्टर की कुछ कंपनियों को छोड़कर नॉन स्ट्रैटेजिक सेक्टर से पूरी तरह बाहर निकल जाएगी.

लेकिन डिफेंस, बैंकिंग, इंश्योरेंस, स्टील,फर्टिलाइजर और पेट्रोलियम स्ट्रैटेजिक सेक्टर के अंतर्गत आते हैं. तो सवाल अभी भी वही है कि फिर क्यों सरकार इन कंपनियों को भी निजी हाथों में बेचना चाह रही है.

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