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COVID-19: OXYGEN की कमी से अस्पतालों में तड़प-तड़प कर मर रहे हैं लोग,कहीं डॉक्टर दे रहे हैं इस्तीफा तो कहीं प्रधानमंत्री को लिख रहे हैं ख़त, स्थिति इतनी भयावह जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल

भारत में COVID-19 संक्रमण दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है शनिवार को 2 लाख  60 हजार से भी अधिक संक्रमित पाए गए वहीं लगभग 15 सौ के करीब लोगों ने इस दुर्दांत बीमारी के कारण दम तोड़ दिया.

लेकिन क्या जो मौतें हुई हैं या जो हो रही हैं वह सच में corona महामारी से हो रही है या फिर इसमें प्रशासनिक लापरवाही का ज्यादा हाथ है.कुछ घटनाएं जो देश के विभिन्न राज्यों से सामने आ रही हैं उससे तो लगता है लोगों के मौत के पीछे corona का घातक प्रकोप तो है ही लेकिन शासन-प्रशासन का चुस्त-दुरुस्त ना होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है.

शहडोल मेडिकल कॉलेज का मामला

एक ताजा मामला मध्यप्रदेश के शहडोल मेडिकल कॉलेज का है जहां कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी के कारण  बारह corona संक्रमितों की मौत हो गई.  corona से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन के प्रेशर में कमी आने की वजह से तड़पते रहे अफरा-तफरी का माहौल मचा रहा, वहां उपस्थित कर्मचारी भी ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए इधर-उधर भागते रहे लेकिन ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाई.

लोगों ने ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए अपने ऑक्सीजन मास्क को बार-बार दबाया उन्हें लग रहा था ऐसा करने से उनके प्राण बच जाएंगे लेकिन अंततः उनके प्राण पखेरू हो गए.

यह कैसी विडंबना है जहां लोग अपनी स्वेच्छा से पीएम केयर्स फंड में लाखों करोड़ों का दान देते हैं लेकिन ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पाती है और लोग बीमारी से नहीं बल्कि सुविधाओं के अभाव में मर जाते हैं.

वाराणसी की घटना डॉ. का पत्र PM के नाम

एक घटना वाराणसी की है यहां के एक डॉक्टर ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर स्थिति की भयावहता को समझने की गुजारिश की है. डॉक्टर ने अपने पत्र में लिखा है कि ऑक्सीजन की कमी से तड़प-तड़प के मरते हुए मरीजों को अब देखना मुश्किल हो रहा है. स्थिति भयावह है इसलिए अविलंब मदद करें.

बिहार की स्थिति 

बिहार की स्थिति जिसको लेकर नीतीश कुमार और भाजपा प्रतिनिधियों द्वारा बार-बार यह कहा जाना कि यहां की व्यवस्था चाक-चौबंद है और corona पर बिहार ने विजय प्राप्त कर ली है. अब इन सभी बातों से पर्दा हटता जा रहा है.

बिहार में बीते सप्ताह से कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है बीते दिन 7 हजार से भी अधिक मामले आए जिसमें सबसे अधिक मामले पटना जिले से हैं. इतने मामलों के बावजूद चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति दयनीय है.

स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल NMCH के  superintendent विनोद कुमार सिंह ने ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी की शिकायत की है और उन्होंने खुद को पद मुक्त करने की बात भी कही है.

2021 04 17
डॉ. विनोद सिंंह का पत्र..

इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य सचिव को एक पत्र भी लिखा है जिसमें कहा है कि अगर ऑक्सीजन की कमी से कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो इसके लिए मुझे ही जिम्मेदार ठहरा जाएगा. इस कारण मुझे मेरे पद से मुक्त किया जाए. इस पत्र से इतर विनोद सिंह ने पत्रकारों से कहा जब हम चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर ऑक्सीजन की उपलब्धता भी सुनिश्चत नहीं कर सकते तो परिजनों का हंगामा करना तो जायज है.

बिहार में आए दिन अनियमितताओं के मामले उजागर होते रहते हैं उसमें चाहे टेस्टिंग की बात हो या फिर QUARANTINE CENTRE में रखे मरीजों के साथ व्यवहार की बात हो या फिर हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के इलाज की बात हो.

बिहार से सटे झारखंड राज्य की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है यहां भी अब दैनिक स्तर पर मामले बढ़ते जा रहे हैं. बीते दिन शनिवार को लगभग 4 हजार मामले आए. वहीं यहां की राज्यपाल भी कोरोना संक्रमित पाई गई हैं. जिन्हें की एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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देश की राजधानी दिल्ली के हालात

अब बात करते हैं देश की राजधानी दिल्ली की जहां कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा य दावा किया जा रहा था कि हमारे पास बेड और अस्पतालों की कोई कमी नहीं है. वहीं अरविंद केजरीवाल आज ऑक्सीजन,बेड और वेंटिलेटर साथ-साथ दवाइयों के टोटे का रोना रो रहे हैं. ऐसा लगता है शायद प्रशासनिक स्तर पर इन लोगों ने अपना होमवर्क सही से नहीं किया था इन्हें इस बात की थोड़ी भी भनक नहीं थी corona महामारी इस विकराल रूप में प्रगट होगी. दिल्ली में शनिवार को 24 हजार से भी ज्यादा मामले आए और डेढ़ सौ से भी अधिक मरीजों की मौत हो गई.

दिल्ली में अब रोज नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं corona महामारी की विभीषिका को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीकेंड कर्फ्यू की घोषणा की थी जिसका कि आज दूसरा दिन है.

लेकिन मुख्य मार्गों को छोड़कर गली मोहल्लों में लोग अभी भी बेखौफ घूम रहे हैं जो की चिंता का मुख्य कारण है. बीट पुलिसिंग जिसका  इस्तेमाल लोगों की लापरवाही को रोकने के लिए किया जा सकता था मगर शायद ऐसा देखने को कम ही मिल रहा है.

मजदूरों का पलायन और RAILWAY का जुर्माना

दिल्ली और मुंबई से मजदूरों का पलायन एक बार फिर से शुरू हो चुका है लोग 500 की टिकट के बजाय ढाई हजार रुपया फाइन देकर भी रेलवे में सफर करने को तैयार हैं. एक बात यहां बताना जरूरी है कि रेलवे के नए निर्देश मैं यह कहा गया है कि अब जो भी व्यक्ति रेल परिसर या ट्रेन में मास्क नहीं लगाएंगे उन्हें ₹500 का जुर्माना देना होगा.

जुर्माने से अगर corona महामारी रुक जाती तो यह जुर्माना राज्य और केंद्र सरकार अपने-अपने स्तर से लगाते आ रहे हैं. दिल्ली में मास्क ना लगाने पर 2000 का जुर्माना है वहीं यूपी में 1000. लेकिन इससे मामलों में कितनी कमी आई है यह तो अनुसंधान का विषय है.

अब तो वैज्ञानिक शोध में भी यह बात साफ होने लगी है कि यह बीमारी हवाओं से फैलती है और साथ ही साथ बंद जगहों में इसके फैैैलने की संंभावना अधिक होती हैै.

covid-19 से एक दिन में संक्रमित हुये 2 लाख से भी अधिक लोग और1038 मौतें, अगरअब भी नहीं संभले भारत के लोग तो भुगतने होंगे अति गंभीर परिणाम..