MUMBAI LOCKDOWN COVID 19

Mumbai में सख्त Lockdown सड़कों पर पसरा सन्नाटा, MP उज्जैन के सारे मंदिर बंद, महाकाल के पुजारी पर कोरोना भारी, Covid-19 से मौतों के आंकड़े में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर फिर भी लोग लापरवाह

कहा जाता है मुंबई में जिंदगी दौड़ती नहीं,बल्कि फर्राटे भरती है..

लेकिन कोरोनावायरस ने एक बार फिर से मुंबई की सड़कों को सोमवार सुबह तक के लिए विरान कर दिया है. लोग घरों में बंद हैं और  अब शायद पहले से कहीं ज्यादा डरे हुए भी हैं.

प्रवासी मजदूर फिर से इस ऊहापोह में फंसे हुए हैं कहीं फिर से  मार्च-अप्रैल का वही दुर्दांत महीना लौटकर तो नहीं आ गया. जिसनें लाखों लोगों को मुंबई से पलायन करने पर मजबूर कर दिया था. घर लौटते हुए मजदूरों की  विचलित करती हुई तस्वीरें शायद ही कोई भूल सकता है.

भारत में कोरोना ने अब अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है कहीं एक ही चिता पर 8 लोगों को लिटाया जा रहा है तो कहीं बाप अपने बेटे को कंधा दे रहा है. लोग अपने कष्ट के निवारण के लिए, मन की शांति के लिए मंदिरों का रुख करते हैं मस्जिदों का रूख करते हैं और अगर मंदिर- मस्जिद भी कोरोना के जद में आने लगे तो सोचिए स्थिति कितनी भयावह है. उज्जैन के महाकाल का मंदिर जिसकी प्रसिद्धि जग जाहिर है कोरोनावायरस से वहां के एक पुजारी संक्रमित पाए गए जिसके कारण सरकार ने एहतियातन उज्जैन के सारे मंदिरों को बंद करवा दिया. फिर भी लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझ रहे और अभी भी लापरवाह बने हुए हैं. यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने भी साफ-साफ कहा कि व्यक्ति बचेगा तभी तो धार्मिक आयोजन होंगे चाहे वह आयोजन किसी भी धर्म से जुड़ा हो, इस महामारी में भीड़ को जमा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती. उनका यह निर्णय प्रथम दृष्टया सत्य जान पड़ता है लेकिन चुनावी आयोजनों का क्या??? मालूम हो कि UP में पंचायत चुनाव की तैयारी जोरों पर है.

तस्वीरें और भी भयानक एवं  भयावह हो जाती हैं जब प्रशासन और सरकार अपनी जिम्मेदारियों को उस स्तर तक नहीं निभा पाते जहां तक निभाना चाहिए. इसके लिए सिर्फ प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराना उच्च दर्जे की हठधर्मिता होगी क्योंकि महामारी के प्रसार में नेताओं से लेकर आम जनता तक की लापरवाही को आसानी से देखा जा सकता है.

कोरोना (कोविड-19) से सबसे ज्यादा खराब हालात महाराष्ट्र के हैं आखिर इसके पीछे क्या कारण है यह अभी भी अनुसंधान का विषय है क्योंकि महाराष्ट्र में जिस हिसाब से प्रतिदिन 50 हजार से भी अधिक कोरोना के मरीज मिल रहे हैं वह बेहद ही चिंता का विषय और चिंतन का भी. मौतों के आंकड़े में भी महाराष्ट्र ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए महाराष्ट्र में लगभग अभी तक 54 हजार से 55 हजार लोगों ने इस बीमारी के कारण अपनी जिंदगी खो दी है. अब ऐसे साक्ष्य मिल रहे हैं जिससे यह पता चलता है की महाराष्ट्र में जो नए मरीज मिल रहे हैं  उनमें से 20% लोगों में कोरोना के नए Double mutant variant के हैं,  Mutant variant का अर्थ है कोरोना का बदला हुआ स्वरूप.

पहले ऐसा कहा जा रहा था कि हो सकता है महाराष्ट्र की झुग्गी झोपड़ियां इस बीमारी के प्रसार में सहायक हो रही हों लेकिन अब तो रिहायशी इलाकों में भी इसका व्यापाक रूप से प्रासार हो चुका है.बड़े-बड़े फिल्मी स्टार, बड़े-बड़े डॉक्टर, नेता, व्यापारी इसकी जद आते जा रहे हैं. ऐसा लगता है कोरोनावायरस ने अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा सबके बीच के भेद को मिटा दिया है..

हां यह अलग बात है कि जो साधन संपन्न हैं वो उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा का लाभ लेकर जल्द से जल्द इस बीमारी से उबर जा रहे हैं लेकिन कहीं-कहीं ऐसा भी देखा गया जहां सारे चिकित्सीय प्रबंध होने के बावजूद भी लोगों की जानें नहीं बच सकी. उदाहरण के तौर पर AMERICA को देख सकते हैं.

भारत में लोगों की लापरवाही को देखकर लगता है कि लोग सभी सामाजिक सरोकारों को भूलते जा रहे हैं. ऐसा लगता है कि यूनान के महान दार्शनिक अरस्तु का वो कथन भी झूठा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और जो व्यक्ति समाज से बाहर है वह या तो देवता है या फिर दानव. दोनो बातों को साथ-साथ रखकर सोचने की जरूरत है अब हमें यह तय करना है कि हम समाज से बाहर रह कर देवता बने रहने का ढोंग करना चाहते हैं या फिर सारे सामाजिक सरोकारों को तोड़कर दानव कहलाना पसंद करते हैं मनुष्य सिर्फ मनुष्य है और उसका मनुष्य हो जाना ही सार्थक है. भारत जैसे विशाल और  विविधता पूर्ण आबादी वाले देश में कोरोना महामारी जैसी विपदा की घड़ी में समाज का अर्थ संकुचित ना होकर व्यापक हो जाता है जिसमें एक की अव्यवहारिक आज़ादी दूसरे के लिये समस्या पैदा कर सकती है.

एक बात जो कि अब विमर्श का विषय बनता जा रहा है कि आखिर टॉप लेवल के केंद्रीय मंत्री, विपक्ष के बड़े नेता, प्रदेशों के मुख्यमंत्री इन सब के पास कोविड-19 से सबंधित एक से बढ़कर एक टॉप इनपुट आते होंगे ये इनपुट वैज्ञानिकों के द्वारा, डॉक्टरों के द्वारा और बड़े बड़े संस्थानों द्वारा प्राप्त होता होगा. इनपुट में इन लोगों को इस बीमारी की गंभीरता के बारे में  जरूर बताया जाता होगा,इसमें किसी भी प्रकार का शक नहींं. लेकिन इन सबके बावजूद इनके आचार और व्यवहार से ऐसा मालूम पड़ता है जैसे कि कोरोना पर इन लोगों ने विजय प्राप्त कर ली है या फिर कोरोना के बारे में इन लोगों को कुछ और ही पता है जो कि सामान्य जन को नहीं मालूम?? जिस तरह से मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री विपक्ष के बड़े-बड़े नेता चुनावी रैलियां और अन्य आयोजनों में शामिल हो रहे हैं और वो भी इतनी लापरवाही से तो लोगों के मन में यह भ्रम पैदा होना बहुत ही सामान्य सी बात है.

स्वास्थ्य मंत्री के दो tweets जिसे हम साझा कर रहे हैं जरा आप सोचिए इससे क्या संदेश मिलता है और इन दोनो में कितना विरोधाभास है??

पहला Tweet…….

 

दूसरा tweet….

क्योंकि जो आंकड़े जारी किए जाते हैं उसके हिसाब से तो इसकी भयावहता से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन जो लापरवाही धरातल पर दिख रही है उससे भी इनकार नहीं किया जा सकता. स्वास्थ्य मंत्री द्वारा लाखों लाख लोगों की भीड़ को तस्वीरों के द्वारा दिखाया जाना यह सब क्या है??  यह सारी बातें समझ से परे है और जहां बातें समझ से परे होने लगे वहां संशय की उत्पत्ति होती है और गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है “संशयात्मा विनश्यति”.

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