Monthly Pension

Monthly Pension Controversy:केरल मंत्रियों के स्टाफ को मासिक पेंशन देने पर बवाल, सरकार और राज्यपाल आमने-सामने

Monthly Pension Controversy: केरल के मंत्रियों के स्टाफ हर 2 साल बाद हो जाते हैं रिटायर और पाते हैं मासिक पेंशन, राज्यपाल ने जताई नाराजगी सरकार ने कहा जारी रहेगी यह योजना

अपने बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान(Arif Mohammad Khan) एक बार फिर से चर्चा में हैं. ताजा मामला केरल सरकार द्वारा मंत्रियों के निजी स्टाफ को पेंशन देने से जुड़ा है. बताते चलें कि केरल में मंत्रियों के वो निजी स्टाफ जिन्होंने 2 वर्ष की सेवा दी है उनको पेंशन देने का प्रावधान साल 1986 से ही लागू है.

इस पेंशन योजना से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार आता है क्योंकि केरल में मंत्रियों को 20 निजी स्टाफ रखने की छूट है और मंत्रियों द्वारा अक्सर 2 साल बाद अपने निजी स्टाफ को बदल दिया जाता है. जिसके कारण ये स्टाफ इस पेंशन स्कीम के लिए पात्र हो जाते हैं.

ऐसा आरोप है कि मंत्रियों के जिन निजी कर्मचारियों(Personal Staff) को पेंशन दी जाती है उनमें से अधिकतर सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं.

इन्हीं सब बातों को लेकर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सत्तारूढ़ पार्टी पर यह आरोप लगाया है कि यह पेंशन योजना सरकारी खर्चे पर माकपा कार्यकर्ताओं को स्थाई पेंशन देने की व्यवस्था बन गई है जो कि एक अवैध व्यवस्था है.

दूसरी तरफ केरल की माकपा सरकार ने इस पेंशन योजना(Pension Scheme) को लेकर साफ कहा है कि सरकार इसे बंद नहीं करने जा रही है. राज्यपाल द्वारा पेंशन के मुद्दे को उठाने के बाद विधायकों (MLA) द्वारा विधानसभा में केरल के राज्यपाल का विरोध में किया गया.

गौरतलब है कि इस पेंशन योजना पर सवाल उठने के बाद आम जनता विधायकों, सांसदों और राज्यपाल को दिए जाने वाले पेंशन पर पर भी सवाल खड़े करने लगे हैं.

आम लोगों का कहना है कि 2 साल बाद हटाए गए मंत्रियों के स्टाफ को दिया जाने वाला पेंशन अगर सरकारी खजाने का दुरुपयोग है तो एक दिन के लिए भी विधायक या सांसद बनने वाले व्यक्ति को आजीवन पेंशन क्यों  दी जानी चाहिए.