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LPG GAS PRICE UPDATES: LPG सिलेंडर की कीमत में एक बार फिर हुई बढ़ोतरी मध्यमवर्ग को एक और तगड़ा झटका

lpg price hike
  • LPG घरेलू रसोई गैस की कीमत बढ़ी
    1 साल में ₹165 मूल्य बढ़े
  • बीते जुलाई में भी हुई थी  वृद्धि
  • इस बढ़ोतरी से उज्जवला योजना की सफलता पर पड़ सकता है असर

पेट्रोल डीजल और खाद्य तेलों के दामों में बेतहाशा वृद्धि से परेशान आम जनों को एक और झटका लगा है, एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में फिर से बढ़ोतरी कर दी गई है.

सामान्यतया तेल कंपनियां प्रत्येक माह की 1 तारीख को एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी करती है, अभी बीते जुलाई में ही एलपीजी के दामों में वृद्धि की गई थी.

बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में ₹25 की बढ़ोतरी की गई है, अब दिल्ली में 14.2 के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 859.50 हो गई है. पहले इसकी कीमत ₹834.50 थी.

वहीं मुंबई में इसकी कीमत दिल्ली के बराबर ही है, जबकि लखनऊ(UP) में बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹872.50 से बढ़कर ₹897.50 हो गई है. अगर कोलकाता की बात करें तो यहां एलपीजी सिलेंडर की कीमत मूल्य वृद्धि के बाद ₹886 हो गई.

मालूम हो कि भारत में 28 करोड़ से अधिक घरेलू गैस कनेक्शन है जिसमें से 8 करोड़ से अधिक घरेलू गैस कनेक्शन PMUY स्कीम यानी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आते हैं.

अगर बात एलपीजी सिलेंडरों पर मिलने वाली सब्सिडी की की जाए तो अब इसके दायरे में भारी कटौती हुई है. अगर उज्जवला योजना के अंतर्गत आए लोगों को छोड़ दिया जाए तो सब्सिडी की राशि अब ना के बराबर है.

साल 2015 में लगभग 1.5 करोड़ (22 करोड़ में) लोगों की सब्सिडी बंद कर दी गई थी क्योंकि उनकी आय 10 लाख से ज्यादा थी. सब्सिडी कम करने के पीछे सरकार का तर्क है कि सब्सिडी का लाभ उन्हें ही मिलना चाहिए जो इसके लिए पात्र हैं.

सरकार ने corona महामारी के दौरान PMGKY स्कीम यानी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत एलपीजी की तीन सिलेंडरों का मुफ्त वितरण प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थियों के बीच किया था, इसके पैसे को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर द्वारा लाभार्थियों के खाते में डाला गया था.

भारत में अमीरों और गरीबों के बीच एक बड़ी खाई है अमीरों पर गैस और तेल के दामों  से कोई फर्क नहीं पड़ता और अगर पड़ता  भी है तो  बहुत ज्यादा नहीं. लेकिन गरीब वर्गों पर इसका असर सीधा पड़ता है.

अगर बात सब्सिडी के लिए आवंटित पैसों की की जाए तो इसके आवंटन में भी दिनोंदिन कटौती की जा रही है. वित्तीय वर्ष 2021 के शुरुआती 11 महीनों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के द्वारा 3559 करोड़ रुपए खर्च किए गए.

अगर इसकी तुलना वित्तीय वर्ष 2020 से की जाए तो यह राशि बहुत ही कम है क्योंकि वित्तीय वर्ष 2020 अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक 22635 करोड़ रुपए सब्सिडी के अंतर्गत दिए गए थे.

वहीं अगर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले सब्सिडी की बात करें तो उसमें प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के लाभार्थियों को दिसंबर 2020 तक 8162 करोड रुपए दिए गए थे. इन आंकड़ों से यह पता चलता है कि सब्सिडी की राशि को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है.

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