Sedition Law

Central Government Ready to Reconsider The Sedition Law(124A): देशद्रोह कानून पर केंद्र ने छोड़ा अड़ियल रवैया, सुप्रीम कोर्ट(SC) में इस कानून पर पुनर्विचार के लिए भरी हामी

Central Government Ready to Reconsider The Sedition Law(124A): सुप्रीम कोर्ट((SC) में देशद्रोह कानून को लेकर नरम पड़ी केंद्र सरकार, पुनर्विचार के लिए तैयार, कहा प्रधानमंत्री मोदी भी पुराने कानूनों को खत्म करने की करते हैं वकालत..

देशद्रोह का कानून(Sedition Law 124A) एक ऐसा कानून जिसे अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों (Indian Freedom Fighters)को दंडित करने के लिए बनाया था लेकिन दुर्भाग्य है कि आज भी यह कानून हमारे देश में लागू है और गाहे-बगाहे चाहे केंद्र में किसी की भी सरकार रही हो इस कानून का दुरुपयोग करने से नहीं हिचकती है. ऐसा इसलिए कि कई बार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने इससे जुड़े मामलों पर बड़ी तीखी टिप्पणी की है साथ ही आरोपी को बाइज्जत बरी भी किया है.

आज देशद्रोह कानून(Sedition Law 124A) को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट(SC) में सुनवाई हो रही थी लेकिन आज का दिन इस काले कानून के लिए ठीक नहीं रहा क्योंकि आज सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने अपने पिछले अड़ियल रवैया को छोड़ते हुए इस कानून पर पुनर्विचार करने की हामी भर दी है.

इससे पहले केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के 1962 के फैसले पर अडिग थी और इस कानून को लेकर टस से मस नहीं हो रही थी लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इस कानून को लेकर कुछ न कुछ नया रास्ता जरूर निकलेगा.

मालूम हो कि देशद्रोह कानून(Sedition Law 124A) के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2021 में केंद्र सरकार से यह सवाल किया था कि केंद्र सरकार इस कानून के प्रावधानों को निरस्त क्यों नहीं कर रही है जो कि गुलाम भारत में अंग्रेजों का एक ऐसा हथियार था जिससे वे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को सताया करते थे.

आज सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल(K.K Venugopal) ने अदालत से यह गुजारिश की है कि जब तक इस कानून पर केंद्र सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं ले लिया जाता है तब तक इससे संबंधित मामलों पर रोक लगा दी जाए.

साथ ही अटॉर्नी जनरल  ने यह भी कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पुराने कानूनों के पक्षधर नहीं हैं जो कि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे हैं और वर्तमान समय में तर्कसंगत और व्यावहारिक नहीं हैं. बताते चलें कि केंद्र सरकार ने कई ऐसे पुराने कानूनों को निरस्त कर दिया है जो कि अंग्रेजों के जमाने से ही चले आ रहे थे.

अब देखना यह है कि केंद्र सरकार देशद्रोह कानून (Sedition Law 124A) को लेकर क्या निर्णय लेती है और इस निर्णय को लेने में कितना वक्त लगता है. वैसे अभी जो इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है उसमें तीन जजों की खंडपीठ है जबकि राजद्रोह कानून पर जो फैसला 1962 में सुनाया गया था उसने पांच जजों की खंडपीठ थी.

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि एक बड़ी पीठ का फैसला छोटी पीठ कभी भी नहीं बदल सकती, तो ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट(SC) राजद्रोह (Sedition Law 124A) से संबंधित मामले को बड़ी पीठ के पास भेज सकता है. बताते चलें कि साल 1962 में राजद्रोह से संबंधित केदारनाथ सिंह बनाम बिहार सरकार के मामले में इस कानून को बरकरार रखने का फैसला दिया गया था.