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BENGAL ELECTION RESULT: BENGAL में अपनी सीट पर हार का सामना करने वाली TMC प्रमुख और वर्तमान CM MAMTA BANERJEE ने कई राज़ खोले, BJP और EC पर लगाये कई गंभीर आरोप

BENGAL ELECTION की तस्वीरें साफ हो गई हैं MAMTA BANERJEE की TMC ने 212 से भी अधिक सीटों के साथ तीसरी बार सत्ता में वापसी की है. नतीजों से यह साफ हो गया है कि टीएमसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. पिछली बार के मुकाबले तृणमूल कांग्रेेस को दो से तीन सीटों का फायदा ही हुआ है. जबकि BJP को सत्ता तो हासिल नहीं हुई लेकिन सीटों की संख्या के मामले में इसे एक संतोषजनक प्रदर्शन कहा जा सकता है .बीजेपी TMC को तो कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाई लेकिन उसने congress और LEFT के वोट प्रतिशत में जबरदस्त सेंध लगाकर इन दोनों का सूपड़ा साफ कर दिया. कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई साथ ही लेफ्ट का भी यही हाल हुआ है.  कांग्रेस की हालत इसी से समझी जा सकती है कि कांग्रेस अपनी 90 सीटों में से मात्र  11 सीटों पर जमानत बचा पाई वहीं लेफ्ट जो कि 170 सीटों में से मात्र 21 पर ही जमानत को बचाने में कामयाब हुआ. वामदलों का मत प्रतिशत 5% रहा जबकि कांग्रेस का मात्र 2.94%. एक राष्ट्रीय पार्टी के लिए इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है. कांग्रेस ने तो उन सीटों पर भी जमानत जप्त करवा दिए जिन सीटों पर कांग्रेस पिछले तीन बार से जीत दर्ज़ करती आ रही थी. राहुल गांधी ने जिन 2 सीटों के लिए चुनावी प्रचार किए उन दोनों सीटों पर भी उम्मीदवारों के जमानत जप्त हो गए. कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों से अच्छा प्रदर्शन तो ISF का रहा जिसने 30 सीटों में से एक सीट पर जीत दर्ज की और मात्र 10 सीटों पर इस पार्टी की जमानत जप्त हुई. नवगठित विधानसभा में अब बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी होगी. मालूम हो कि 2016 में बीजेपी को मात्र 3 सीटें मिली थी.

परिणामों से यह साफ हो गया है कि अपनी पार्टियों को छोड़ दूसरी पार्टियों में गए दलबदलूओं और वर्तमान केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्रियों को बंगाल की जनता ने नकार दिया. बाबुल सुप्रियो लॉकेट चटर्जी जैसे बड़े चेहरे भी अपनी अपनी सीटें बचा पाने में कामयाब नहीं हो पाए वहीं जहां मतगणना के शुरुआती रुझानों में TMC प्रमुख ममता बनर्जी अपने पुराने सहयोगी शुभेंदु अधिकारी से पिछड़ती नजर आ रही थीं लेकिन 12 से 15वें राउंड में ममता ने एक अच्छी बढ़त बना ली थी.लेकिन इसके बाद एक बार फिर से शुभेंदु अधिकारी ने ममता को पट्खनी दे दी. इस हार के बाद MAMTA ने अपने बयानों से चुनाव आयोग पर जोरदार हमला किया और कहा आयोग की भुमिका संदिग्ध है. इसके लिए मैं कोर्ट जाउंगी.ममता बनर्जी ने कहा VOTE की COUNTING में जो अधिकारी लगे हुए थे उन पर ऊपर से दबाव था वे पूरी तरह से डरे हुए थे. जब दोबारा काउंटिंग की बात आई तो उनको जान से मारने की धमकी तक दी गई. ममता बनर्जी ने कहा यह मेरे खिलाफ बहुत बड़ी साजिश की गई है जिसका जल्द ही पर्दाफाश होगा. तृणमूल प्रमुख ने आगे कहा कि जब महामहिम राज्यपाल द्वारा मुझे मेरी सीट पर जीत दर्ज करने के लिए बधाई के मैसेज तक दे दिए गए उसके बाद आखिर अचानक से क्या हुआ कि सारी परिस्थितियां बदल गई. ममता बनर्जी ने कहा कि इलेक्शन कमिशन की वेबसाइट का सर्वर भी 4 घंटे तक डाउन रहा.इन सब बातों से तो ऐसा ही लगता है कि जैसे मेरे खिलाफ एक गहरी साजिश रची गई है. ममता बनर्जी ने जो आरोप लगाए उन आरोपों में कुछ तो दम है ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है क्योंकि जब वहां पर मतगणना का कार्य चल रहा था तो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर बार-बार जो आंकड़े दिखाए जा रहे थे उससे यह अनुमान लगा पाना मुश्किल था कि आखिर वहां हो क्या रहा है और ऐसा ही कुछ माजरा देखने को बिहार के विधानसभा चुनावों में भी मिला था तब तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग पर उंगलियां उठाई थीं. अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग अपनी सफाई में क्या कहते हैं और अगर ममता बनर्जी कोर्ट जाती हैं तो उनको कोर्ट से क्या राहत मिलती है. वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने ममता बनर्जी को मिलने के लिए बुलाया है. प्रचंड बहुमत के बाद यह तो साफ है कि बंगाल की अगली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही होंगी लेकिन अभी देखना यह होगा कि कहीं महाराष्ट्र की कहानी बंगाल में भी न दोहराई जाए क्योंकि ममता बनर्जी जो कि चुनाव हार चुकी हैं. उनको अपने पद पर बने रहने के लिए भारतीय संविधान के अनुसार शपथ ग्रहण के 6 महीने के भीतर ही सदन की सदस्यता ग्रहण करनी होगी.मालूम हो कि बंगाल में एक सदनी व्यवस्था है यानी कि वहां पर सिर्फ विधानसभा है. इस कारण ममता बनर्जी को 6 महीने के भीतर ही बंगाल के किसी भी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतना होगा.लेकिन विशेष परिस्थिति में 6 महीने की अवधि को विस्तार भी दिया जा सकता है लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग की अनुशंसा आवश्यक है.अब सबकुछ चुनाव आयोग पर निर्भर करता है कि चुनाव आयोग बचे हुए 2 सीटों पर कब मतदान कराते हैं क्योंकि corona महामारी के कारण मतदान को टाला भी जा सकता है. अगर ऐसी कोई परिस्थिति बनती है तो फिर से बंगाल में एक संवैधानिक संकट उत्पन्न हो जाएगा और ममता बनर्जी की कुर्सी खतरे में आ जाएगी. अगर सम्पूर्ण घटनाक्रम को देखें तो ऐसा लगता है कि अभी भी चुनाव आयोग की ही भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. लेकिन ममता बनर्जी जिस जुझारूपन के लिए जानी जाती हैं उसे देख कर ऐसा लगता है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना ना के बराबर है.