BENGAL CM ममता बनर्जी CBI दफ्तर पहुंची FIR दर्ज़ आखिर क्यों राज्यपाल धनखड़ बार-बार संविधान पर जोर दे रहे हैं इसमें ही छिपा है सारा खेल

BENGAL CBI TMC द भारत बंधु
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BENGAL में फिर से TMC और BJP के बीच CBI की एंट्री, टीएमसी के चार वर्तमान नेता के साथ-साथ एक पूर्व नेता भी गिरफ्तार

साल 2014 के एक स्टिंग ऑपरेशन मामले में बंगाल के तीन TMC नेताओं और एक पूर्व TMC नेता को CBI ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया. इस स्टिंग ऑपरेशन को NARAD TV NEWS ने अंजाम दिया था.

उस समय यह चारों  नेता बंगाल में मंत्री थे. इस ऑपरेशन में यह दिखाया गया है कि यह चारों अपने मंत्री पद का नाजायज फायदा उठाकर लाभ कमाना चाह रहे थे.

TMC के तीन नेताओं के नाम फरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा है. वहीं चौथे नेता शोभन चटर्जी हैं जो पहले टीएमसी के साथ थे फिर चुनाव के दौरान बीजेपी में चले गए थे. लेकिन इन दिनों उनकी ना तो टीएमसी से बन रही है और ना ही बीजेपी से.

आज इन चारों को सीबीआई दफ्तर पूछताछ के लिए ले जाया गया था लेकिन तभी ममता बनर्जी भी गुस्से में भरी हुई सीबीआई दफ्तर पहुंच गई. इसके बाद खबरों के अनुसार उनके समर्थक भी सीबीआई दफ्तर पर पत्थरबाजी करने लगे.

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लोगों को खदेड़ने की कोशिश की. बीजेपी की तरफ से ममता बनर्जी पर एफ आई आर दर्ज कराई गई है.

ममता बनर्जी ने यह आरोप लगाया है कि सीबीआई टीएमसी के नेताओं पर कार्यवाही तो कर रही है लेकिन वह मुकुल रॉय और वर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही.

मालूम हो कि यह मामला 2016 में सार्वजनिक हुआ था और मार्च 2017 में सीबीआई ने जांच शुरू की थी.

वहीं इन गिरफ्तारियां को विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी ने गैरकानूनी बताया है. उनका कहना है इसके लिए किसी भी प्रकार की नोटिस नहीं दी गई है. इसलिए यह पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है.

यहां पर यह बताना जरूरी है कि अगर कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति और रज्यपाल को छोड़कर आपराधिक मामले में लिप्त पाया जाता है तो उस पर कार्यवाही की जा सकती है.

अगर विधानसभा या लोकसभा की कार्यवाही चल रही हो तो उस दौरान विधानसभा अध्यक्ष या लोकसभा अध्यक्ष से अनुमति लेना आवश्यक है.वहीं TMC नेताओं की  गिरफ्तारी से पहले CBI ने राज्यपाल से अनुमति ले ली थी.

अब आते हैं राज्यपाल धनकड़ की बातों पर. राज्यपाल धनकड़ बार-बार एक बात का जिक्र कर रहे हैं की ममता बनर्जी को कानून और संविधान दोनों का पालन करना चाहिए. उनका यह कहना उनके पद के हिसाब से उचित भी है और तर्कसंगत भी. लेकिन राज्यपाल बार-बार कानून व्यवस्था से ज्यादा जोर संविधान के पालन पर दे रहे हैं. इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है.

संविधान का article 356, 365 और राज्यपाल जगदीश धनखड़ की भूमिका

धनकड इस बात को जानते हैं कि कानून व्यवस्था के आधार पर किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन को नहीं लगाया जा सकता. राष्ट्रपति शासन का आधार संविधान का उल्लंघन है. अगर कोई भी सरकार संविधान के अनुरूप कार्य नहीं करती है तो उस राज्य में राज्यपाल राष्ट्रपति से यह अनुशंसा कर सकता है कि यहां राष्ट्रपति शासन लगा दी जाए.इसके लिए अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया जाता है.

वहीं अनुच्छेद 365 को आधार बनाकर अनुच्छेद 356 का प्रयोग किया जा सकता है. इसका अर्थ यही है कि राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के अंतर्गत दो आधारों पर घोषित किया जा सकता है पहले आधार के बारे में तो बता दिया गया है.अब  जानते हैं दूसरे आधार के बारे में.

अनुच्छेद 365 के अनुसार यदि कोई राज्य केंद्र द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने में सफल नहीं होता है तो यह राष्ट्रपति के लिए विधि संगत है कि वह स्थिति को अपने हाथ में ले और राज्य में संवैधानिक व्यवस्था को कायम करने के लिए अनुच्छेद 356 के अनुसार  राष्ट्रपति शासन लगा दे.

बंगाल में जो हिंसा की घटनाएं बार-बार घट रही हैं उसका समर्थन किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं है. लेकिन इन घटनाओं के पीछे आखिर क्या कारण है. इसका भी खुलासा होना जरूरी है.

आज भी मीडिया रिपोर्ट्स में यह बातें सामने आई हैं कि कुछ टीएमसी समर्थक CBI और CRPF के लोगों पर हमला कर रहे थे. बंगाल में अब सारी परिस्थितियां ऐसी बनती जा रही हैं जिससे कहीं ऐसा ना हो कि राष्ट्रपति को कहना पड़ जाए कि बंगाल सरकार संवैधानिक रूप से विफल हो चुकी है और यहां राष्ट्रपति शासन ही अंतिम विकल्प है.

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