Patanjali Controversial Advertisement

Baba Ramdev Patanjali Controversial Advertisement: बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने आरोपों के बाद एक हफ्ते में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाली दवा का विज्ञापन किया बंद..

Baba Ramdev Patanjali Controversial Advertisement: बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि पर गैरकानूनी रूप से दवा का प्रचार करने के आरोप के बाद एक हफ्ते में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाली दवा Lipidom का विज्ञापन किया बंद, केरल के नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर ने की थी आयुष मंत्रालय से शिकायत..

बाबा रामदेव(Baba Ramdev) और उनकी पतंजलि(Patanjali) एक बार फिर से चर्चा में है इसके पीछे वजह है रामदेव द्वारा प्रचारित कोलेस्ट्रॉल को एक हफ्ते में नियंत्रित करने वाली दवा के विज्ञापन को वापस लिया जाना. दरअसल पतंजलि समूह की आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करने वाली दिव्य फार्मेसी(Divya Farmacy) ने विवाद गहराता देख हॉर्ट और लिवर(Heart and Liver)) से जुड़ी कुछ दवाओं के विज्ञापन को बंद कर दिया है.

ऐसा कंपनी को कानूनी रूप से मजबूर होकर करना पड़ा क्योंकि भारत में कोई भी व्यक्ति या संस्था या कंपनी कुछ बीमारियां जिसमें हृदय रोग रक्तचाप कैंसर इत्यादि शामिल हैं के उपचार से संबंधित दवाओं के विज्ञापन नहीं चला सकते हैं, ऐसा करना कानूनन अपराध है.

विज्ञापन के खिलाफ शिकायत मिलने पर उत्तराखंंड सरकार ने थमाया था नोटिस, तब जाकर नींद से जागी बाबा रामदेव की कंपनी और विज्ञापन किया बंद 

ऐसे सभी विज्ञापन भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आते हैं. भ्रामक विज्ञापनों की बात करें तो भारत सरकार ने इससे संबंधित जो आंकड़े संसद में पेश किए हैं, वह बेहद ही चौंकाने वाले हैं. आयुष मंत्रालय ने संसद में जो रिपोर्ट पेश की है उसके अनुसार साल 2014 से 2021 के बीच भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित 1 हजार 416 मामले दर्ज किए गए थे.

रामदेव की कंपनी पतंजलि ने विज्ञापन को वापस लेने का फैसला यूं ही नहीं किया बल्कि केरल के नेत्र विशेषज्ञ ने आयुष मंत्रालय में शिकायत दर्ज करवाई थी. जिसमें रामदेव की दवा लिपिडोम के भ्रामक विज्ञापन का जिक्र किया गया था.

पतंजलि द्वारा इस दवा के विज्ञापन में यह कहा गया था कि यह दवा एक हफ्ते में ही कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल कर लेती है और इससे हार्ट अटैक(Heart Attack) और उक्त रक्तचाप(High Blood Pressure) जैसी समस्याओं से निजात मिलती है.

जब भी इस प्रकार के भ्रामक विज्ञापन कर किए जाते हैं तो इसके प्रभाव में आकर कुछ लोग इन दवाओं पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं, इससे उनकी समस्याएं घटने के बजाय और बढ़ जाती हैं और  इसके भारी परिणाम भुगतने पड़ते हैं. भारत सरकार द्वारा समय-समय पर ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर कार्यवाही की जाती है.