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अफगानिस्तान (Afganistan) में सत्ता परिवर्तन को लेकर मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स(MEA) का आया बयान

अफगानिस्तान(Afganistan) को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) का पहली बार आया बयान

अफगानिस्तान में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं. कल हुए बम धमाकों में मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लगभग 80 लोग मारे गए.

भारत सरकार ने भी इस घटना की निंदा की थी, लेकिन अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत सरकार की आगे की नीति क्या होगी, क्या भारत सरकार तालिबान से बातचीत करेगी, इन सभी बातों को लेकर विपक्ष और मीडिया द्वारा सरकार से सवाल पूछे जा रहे थे.

सरकार इस पर कुछ भी सीधे-सीधे बोलने से बचती रही थी. कई नेताओं ने आरोप लगाया था कि सरकार तालिबान से बैक डोर बातचीत कर रही है.

इन सभी घटनाक्रमों के बाद आज मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर (MEA) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है.

जिसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन को लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है. मिनिस्ट्री आफ एक्सटर्नल अफेयर्स ने कहा हैै काबुल(Kabul) में सरकार बनाने वाली किसी भी अथॉरिटी के बारे में स्पष्टता का अभाव है या कोई स्पष्टता नहीं है.

भारत सरकार के इस बयान से ऐसा जाहिर हो रहा है कि भारत अफगानिस्तान को लेकर अभी असमंजस की स्थिति में है. ऐसा इसलिए क्योंकि अफगानिस्तान अभी वैश्विक शक्तियों का अखाड़ा बन गया है.

इसमें एक तरफ रूस(Russia) तो दूसरी तरफ अमेरिका(America) है. जहां अमेरिका तालिबान की सत्ता को पूरी तरह से नकार रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ रसिया तालिबान को लेकर नरम है.

भारत यह कभी नहीं चाहेगा कि वह इन दोनों महा शक्तियों से अपने संबंधों को खराब करे. इसलिए भारत की नीति रहेगी कि वह दोनों महा शक्तियों से संतुलन बना कर रहे.

साथ ही अभी वर्तमान परिस्थिति में भारत सरकार की प्राथमिकता यह है कि अफगान में फंसे हुए भारतीय लोगों को जल्द से जल्द रेस्क्यू करा लिया जाए.

अभी किसी भी प्रकार की बयानबाजी से इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर असर पड़ने की संभावना है.

अफगानिस्तान के हालात के बारे में वहां से लौटे अफगानिस्तान के सांसदों ने विस्तार से बताया है. उनका कहना है अफगानिस्तान में जिंदगी बहुत ही दूभर हो चुकी है.

वहां हर तरफ भय का वातावरण है, महिलाओं पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं साथ ही अल्पसंख्यक वर्गों के साथ अच्छा सलूक नहीं किया जा रहा है.

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