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Category: कस्तूरी

  • स्वाभिमान अभिमान जब हो जाता है

    स्वाभिमान अभिमान जब हो जाता है

      स्वाभिमान अभिमान जब हो जाता है,मानव खुद के ही विरुद्ध तब हो जाता है! गढ़ने लगता है संबंधों की नई परिभाषाएंकर्ण दुर्योधन का मित्र हो जाता है। घात-प्रतिघात, वैर-विषय, यही बोझ हैमानव मन का!चढ़ पाता है वही शिखर जो इस बोझ सेनिर्बोझ हो जाता है। ना सुख मिथ्या है!! ना दुख अमर,फिर क्यों मानव […]